मेरी पाँच कवितायें
रासबिहारी पाण्डेय
1/लड़कियां
चैनलों में न्यूज़ पढ़ती लड़कियां
युद्ध के मैदान से रिपोर्टिंग करती लड़कियां
लड़ाकू जहाज उडा़ती लड़कियां
अस्पतालों में मरीजों का उपचार करती
लड़कियां
न्यायपालिका,कार्यपालिका
और कारपोरेट
जगत में मुस्तैदी से ड्यूटी निभाती लड़कियां......
पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन्हें
काम करते देखकर छाती चौड़ी हो जाती है
मगर अजीब लगता है जब देखता हूँ
ड्राइविंग सीट पर अगल बगल दो पुरुषों को बिठाये
ड्राइविंग सीट पर अगल बगल दो पुरुषों को बिठाये
ऑटो चलाती लड़कियां
पेट्रोल पंप पर गाड़ियों में तेल भरती
लड़कियां
वर्दी पहनकर चौकीदार बनी लड़कियां
होटलों में शराब परोसती लड़कियां
फूहड़ गीतों पर बदन दिखाऊ
नृत्य करती लड़कियां
शर्म से सिर उठता ही नहीं.........
स्त्री से बेपनाह प्रेम का दम भरने वाले
पुरुष कैसे धकेल देते हैं इन्हें
ऐसे गलीज़ चौराहों पर
आखिर इनके घरों में भी तो होते हैं
पति, पिता, भाई …..
जिनके परिवारों में कोई नहीं
उनके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना …..
2 /धर्म की परीक्षा
जिस जुए के कारण हुआ द्रौपदी का चीरहरण
पांडवों को दासत्व स्वीकार करना पड़ा
दुर्योधन,दु:शासन
और कर्ण ने क्या कुछ नहीं कहा
विष का घूंट पीकर सुनना पड़ा सब
और इतना सब होने के बाद जब इंद्रप्रस्थ को
चल पड़े थे पांडव
आधा रास्ता ही पहुंचे थे कि धृतराष्ट्र
द्वारा भेजा दूत
जुआ का प्रस्ताव लेकर पुनःआ पहुंचा
युधिष्ठिर ने रथ मोड़ दिया हस्तिनापुर की ओर
फिर बिछी चौसर की बिसात
और अबकी हारने के बाद मिला
बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास
शर्त के अनुसार अवधि पूरी होने के बाद
दुर्योधन पाँच गांव तो क्या
सुई की नोंक भर जमीन देने को भी
राजी नहीं हुआ
और तब हुआ महाभारत
स्वर्गारोहण के समय द्रौपदी समेत
अर्जुन भीम नकुल सहदेव सब बर्फ में धँसते गए
क्योंकि सबके मन में थी कोई न कोई खोट
धर्म की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाये
बार बार की परीक्षाओं में पास हुए सिर्फ
युधिष्ठिर
इसलिए सशरीर सिर्फ वही स्वर्ग पहुंचे
छले जाने के बाद भी स्वयं छल न करो
स्वधर्म पर डँटे रहो
यही है सबसे बड़ा धर्म
धर्म की सबसे बड़ी परीक्षा. ….!
3/प्रिय वियोग
जिस राज्य के लिए हुआ
सृष्टि का सबसे भयानक नरसंहार
कौरवों की ग्यारह अक्षौहिणी और
पांडवों की सात अक्षौहिणी सेना स्वाहा हो गई
पांडव ठीक से पचास वर्ष भी उस
राज्य का भोग नहीं कर पाए
श्री कृष्ण के शरीर छोड़ते ही
परीक्षित को सत्ता सौंपकर चल पड़े
हिमालय के रास्ते स्वर्ग कीओर
इसे कहते हैं प्रिय वियोग
जीवन से कोई एक व्यक्ति भी निकल जाए
तो जीवन निरर्थक लगने लगता है
इतना कि जीने की इच्छा ही समाप्त हो जाती है
4/ मरने की तैयारी
मरने से सब डरते हैं
बस हर पल जीने की तैयारी करते हैं
सजाते हैं खूब घर द्वार
खरीदते हैं नई चीजें
पर कभी नहीं समझते कि
उतना ही आवश्यक है मृत्यु की तैयारी
बल्कि उससे भी कहीं अधिक
क्योंकि समाज का तराज़ू
सुनार के तराजू से कहीं अधिक
मूल्यवान होता है
इसमें होता है हर पल का पूरा पूरा हिसाब
बरसों बरस समाज की पारखी नजरों से
गुजरते हुए बनती है एक छवि
किसी एक के कहने से कुछ नहीं होता
कितना भी अर्जित कर लो धन
कितना भी कर लो दान धर्म
दोस्तों को दे डालो पार्टियां
छवि बदलती नहीं
जो है वही रहती है
इसलिए करो मरने की तैयारी
कुछ ऐसी कि तुम्हारे जाने के बाद लोग
मुँह न बिचकायें, खामोश न रहें
बल्कि उदास होकर इतना तो जरूर कहें ….
ऐसे लोग अब दुनिया में बहुत कम रह गए हैं !
5/ कब आएगी वह चेतना ?
पांच पांच पतियों के रहते हुए
द्रौपदी भी बच नहीं पाई समाज की
कुदृष्टि से
पांडवों के वनवास के समय
असुर जटासुर ने की अपहरण की कोशिश
उसका वध कर बचा लाए भीम
कुछ दिनों बाद ननद दु:शला के पति
जयद्रथ ने किया अपहरण का प्रयास
पीछे दौड़े पांडव
जयद्रथ को मार पीटकर बालों की
चोटियां बनाकर छोड़
दिया जीवित
ताकि बचा रह सके
बहन का सुहाग
वही बना अभिमन्यु की मृत्यु का कारण
इंद्र के पुत्र जयंत ने मारी सीता को चोंच
हर ले गया सीता को रावण
दमयंती को जब पा न सका कलियुग
जुए के पासों में घुसकर नल को किया पराजित
कठिन तपस्या के बाद प्रसन्न हुये शिव से वरदानस्वरूप
सुंद उपसुंद ने पार्वती को ही चाहा
21 वीं सदी में भी कहां बदला है समाज
पुलिस की ट्रेनिंग ले रही लड़कियाँ
बन जाती हैं बलात्कार की शिकार
हो जाती हैं गर्भवती
विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में
शिक्षक और छात्र कर रहे हैं अनाचार
नारी सुरक्षा गृह बन गए हैं वेश्यालय
बाबा ! ज्यों ज्यों
बढ़ती है उम्र
डर लगता है इस दुनिया से
कैसे बचूँगी खुद और कैसे बचा पाऊंगी अपनी बच्चियों को
जैसे अपने पुरुषार्थ से लोग अर्जित करते हैं धन और यश
वैसे स्त्री को अर्जित करना कब सीखेंगे
कब आएगा वह युग
कब आएगी वह चेतना…?